Monday, January 26, 2026
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन और प्रयासों से म.प्र. बना आइडियल इंवेस्टमेंट स्टेट

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश में निवेश और औ‌द्योगिक विकास की दिशा को एक नई स्पष्टता और मजबूती दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उद्योगों से जुड़े नवाचार अब नीतियाँ और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं, निवेशकों के बढ़ते विश्वास और जमीन पर दिखाई देने वाली औ‌द्योगिक गतिविधियों के रूप में सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुरुआत से ही यह लक्ष्य तय किया कि मध्यप्रदेश को ऐसा निवेश-अनुकूल राज्य बनाया जाए, जहाँ उद्‌द्योगों को दीर्घकालिक अवसर मिले, युवाओं के लिए रोजगार का विस्तार हो और प्रदेश की अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर, सक्षम और टिकाऊ बने। उनकी कार्यशैली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वे प्रत्येक नवाचार को व्यावहारिक और क्रियान्वयन-केंद्रित तरीके से आगे बढ़ाते हैं। निवेशकों से संवाद, नीतियों का सरलीकरण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और औ‌द्योगिक अवसंरचना के विस्तार आदि हर स्तर पर उन्होंने समयबद्ध और परिणाम-केंद्रित कार्य शैली को प्राथमिकता दी है। इसी कारण आज प्रदेश में उ‌द्योग स्थापना की गति पहले की तुलना में तेज दिखाई देती है, बड़े निवेश वास्तविक रूप से जमीन पर उतर रहे हैं और नए रोजगार अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की वर्तमान औ‌द्योगिक प्रगति यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नेतृत्व दूरदर्शी होने के साथ स्थिर, भरोसेमंद और परिणाम देने वाला है। प्रदेश अब केवल निवेश आकर्षित करने वाला राज्य नहीं, बल्कि उ‌द्योगों के लिए एक विश्वसनीय विकल्प और रोजगार सृजन के लिए एक मजबूत आधार के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने औ‌द्योगिक विकास और निवेश आकर्षण के नए आयाम स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में निवेश से जुड़े प्रयास व्यापक और बहु-स्तरीय रहे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर निवेशक समुदाय के साथ संवाद को नए आयाम दिए गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, जापान, दुबई और स्पेन में आयोजित सत्र महत्वपूर्ण साबित हुए, जिनसे प्रदेश को 89 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निवेश अभिरुचि प्राप्त हुई। राष्ट्रीय स्तर पर मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, पुणे, नई दिल्ली, कोयम्बटूर, सूरत, लुधियाना और असम में आयोजित संवादों ने 2.3 लाख करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव और लगभग 2 लाख रोजगार अवसरों का आधार निर्मित किया। प्रदेश के विभिन्न संभागों और जिलों जैसे उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम और शहडोल में आयोजित क्षेत्रीय उ‌द्योग सम्मेलन (RIC) तथा रतलाम के राइज- रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट कॉन्क्लेवकार्यक्रम ने 2.65 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 3 लाख रोजगार अवसरों का सुदृढ़ आधार तैयार किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्देश्य केवल संवाद बढ़ाना नहीं रहा, बल्कि निवेश को वास्तविक रूप से धरातल पर उतारना उनकी प्रमुख प्राथमिकता रही है। इसी दृष्टि से मध्यप्रदेश जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम 2025 के माध्यम से 20 अधिनियमों के 44 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया, जिससे निवेशकों और उ‌द्यमियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और उ‌द्योग अनुकूल बनी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों के प्रत्यक्ष परिणाम जीआईएस 2025 में स्पष्ट रूप से दिखाई दिए, जहाँ प्रदेश को 26.61 लाख करोड़ रूपये की निवेश प्रस्ताव और लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होंगे। इनमें से 6,20,325 करोड़ रुपये का निवेश वास्तविक रूप से जमीन पर उतर चुका है, जो निवेशकों के विश्वास और प्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों का मजबूत प्रमाण है। औ‌द्योगिक अधोसंरचना के विस्तार में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले दो वर्षों में 4,237 एकड़ भूमि उद्‌द्योगों को आवंटित की गई, जिससे 2 लाख करोड़ रूपये से अधिक निवेश और करीब 2.5 लाख रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश के 16,936 हेक्टेयर में विकसित 25 नए औ‌द्योगिक पार्क उ‌द्योगों के विस्तार के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

विशेष औ‌द्योगिक पार्कों के विकास में भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। धार में पीएम मिही पार्क वस्त्र उ‌द्योग के लिए नई संभावनाओं का केंद्र बन रहा है। यहाँ 2,158 एकड़ क्षेत्र में विकसित पार्क प्रदेश में 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क चिकित्सा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में प्रदेश को नई पहचान दे रहा है। मुरैना का मेगा लेदर फुटवियर पार्क चमड़ा और फुटवियर उ‌द्योग के लिए बड़े पैमाने पर अवसर तैयार कर रहा है। मोहासा-बाबई, नर्मदापुरम में विकसित नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र में दोनों चरणों में 1050 एकड़ से अधिक भूमि अग्रणी कंपनियों को आवंटित की गई है, जो प्रदेश की ग्रीन एनर्जी क्षमता को मजबूत कर रहा है।

नीति सुधारों ने भी प्रदेश में उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जीआईएस-2025 के दौरान राज्य सरकार ने 18 नई प्रगतिशील नीतियाँ जारी कीं, जिनमें औ‌द्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025, निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025 और लॉजिस्टिक्स नीति 2025 जैसी नीतियों विशेष रूप से प्रभावकारी रही हैं। प्रदेश ने 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर अवार्ड 2024 प्राप्त किया। समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 दृष्टि-पत्र का विमोचन, उ‌द्योग एवं रोजगार वर्ष 2025 की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण और इन्वेस्ट एमपीपोर्टल का शुभारंभ प्रदेश के निवेश-केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करते हैं।

इन सभी प्रयासों का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि अब प्रदेश में केवल प्रस्तावों की बात नहीं रही, बल्कि निवेशक वास्तविक रूप से उ‌द्योग स्थापित कर रहे हैं। रोजगार सृजन की गति तेज हुई है, औ‌द्योगिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं और निवेशकों तथा सरकार के बीच भरोसे का वातावरण और मजबूत हुआ है। मध्यप्रदेश अपने औ‌द्योगिक सफर के उस चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ नेतृत्व की स्पष्ट दिशा, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और नीति-आधारित स्थिरता मिलकर एक ऐसा निवेश-अनुकूल माहौल निर्मित कर रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को देश के प्रमुख औ‌द्योगिक राज्यों की पंक्ति में मजबूती से स्थापित करता दिखाई देता है।

 

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