Monday, January 26, 2026
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दिल्ली-काबुल रिश्तों में नया मोड़! भारत खोलेगा दूतावास, अफगानिस्तान ने दिया सुरक्षा का भरोसा

काबुल  
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत के ऐतिहासिक दौरे पर हैं। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और मुत्तकी के बीच बेहद अहम बातचीत हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए भारत पूरी तरह प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि भारत जल्द ही काबुल में अपना दूतावास खोलेगा। बता दें कि चार साल पहल अशरफ गनी के अफगानिस्तान से भागने और तालिबान के कब्जे के बाद भारत ने अपना दूतावास काबुल में बंद कर दिया था। गौरतलब है कि इस वक्त अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच भी संबंध तनावपूर्ण हैं। ऐसे में भारत और अफगानिस्तान की निकटता पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भारत के खिलाफ नहीं होगा अफगान जमीन का इस्तेमाल
मुत्ताकी ने खुलकर स्वीकार किया है कि भारत हमेशा अफगान लोगों के साथ खड़ा रहा है और कई क्षेत्रों में उनकी सहायता की है। अफगानी विदेश मंत्री ने भी आश्वासन दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के लिए कतई नहीं होने देंगे। बता दें कि भारत ने अपने दूतावास को बंद करने के एक साल बाद ही काबुल में एक अस्थायी मिशन शुरू कर दिया था जिसका उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना और अफगानिस्तान की जनता को सहायता मुहैया कराना था। वहीं अब काबुल में रूस, ईरान और पाकिस्तान समेत करीब एक दर्जन देशों के दूतावास काम कर रहे हैं। हालांकि तालिबानी शासन को मान्यता अब तक केवल रूस ने ही दी है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, हमारे विकास और क्षेत्रीय शांति के लिए दोनों देशों का आपसी सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि काबुल में भारत के टेक्निकल मिशन को जल्द ही दूतावास में बदल दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए विदेश मंत्री ने कोई समय सीमा नहीं बताई है। बता दें कि भारत के साथ संबधों को सुधारने और आगे बढ़ाने के ही उद्देश्य से मुत्तकी भारत के 6 दिवसीय दौरे पर हैं। भारत और अफगानिस्तान के साथ हमेशा ही अच्छे संबंध रहे हैं। हालांकि अब तक भारत ने तालिबानी शासन को मान्यता नहीं दी है।

पश्चिमी जानकारों का कहना है कि तालिबानी प्रशासन को मान्यता ना मिलने की केवल एक वजह है और वह है महिलाओं पर प्रतिबंध। बता दें कि अब तक यूएनएससी ने तालिबानी नेताओं की यात्रा पर प्रतिबंध लगा रखे थे। प्रतिबंध हटने के बाद ही उनकी भारत यात्रा संभव हो पाई है।

 

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