Monday, January 26, 2026
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दिवाली 20 अक्टूबर को, 21 अक्टूबर को मनाएं ये शुभ आयोजन – पूरी जानकारी पढ़ें

 दिवाली के पंच दिवसीय त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो चुकी है. इस साल लोगों के बीच में दिवाली की तिथि 20 अक्टूबर या 21 अक्टूबर, को लेकर बहुत ही बड़ा कंफ्यूजन है, आखिर दीपावली का पर्व कब मनाया जाएगा? इसी वजह से इन तिथियों को लेकर देशभर के बड़े ज्योतिषियों में, पंडितों और ज्योतिर्विदों में बहस भी छिड़ी हुई है. जिसका समाधान निकलते हुए ये सामने आया है कि प्रदोष व्यापिनी तिथि के कारण दिवाली इस बार 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी.

20 अक्टूबर को क्यों मनाई जाएगी दिवाली?

गाजियाबाद के दुर्गा मंदिर के जाने माने ज्योतिषाचार्य पंडित राम किशोर जी के मुताबिक, इस साल 20 अक्टूबर को दिवाली मनाना उचित होगा. क्योंकि इसी दिन प्रदोष काल, वृषभ लग्न और महानिशीथ काल, सभी योग प्राप्त हो रहे हैं. दरअसल, इस दिन प्रदोष काल शाम 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 18 मिनट पर रहेगा. वहीं, वृषभ लग्न शाम 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 3 मिनट रहेगा. इसके अलावा, महानिशीथ काल का समय मध्यरात्रि 11 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर की अर्धरात्रि 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. 20 अक्टूबर की शाम बनने जा रहे इन्हीं संयोगों में लक्ष्मी पूजन और काली पूजन करना उचित होता है, इसलिए इसी दिन दिवाली मनाई जाएगी. 

20 अक्टूबर को है दिवाली तो 21 अक्टूबर को क्या है?

आगे ज्योतिषाचार्य पंडित राम किशोर जी बताते हैं कि, 20 अक्टूबर को अमावस्या तिथि दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और यह तिथि 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट अमावस्या तिथि ही रहेगी. यानी 21 अक्टूबर को अमावस्या का समापन सूर्यास्त के साथ हो जाएगा. इसके बाद प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो जाएगी. इसका मतलब है कि 21 अक्टूबर को अमावस्या तिथि ना तो प्रदोष काल में रहेगी और ना रात्रि में रहेगी. इसलिए, इस दिन कोई भी त्योहार नहीं है यानी यह दिन खाली रहेगा. हालांकि, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में कार्तिक अमावस्या का स्नान-दान होगा, जो कि बहुत ही विशेष अनुष्ठान माना जाता है. 

20 अक्टूबर को ये रहेगा लक्ष्मी गणेश का पूजन मुहूर्त

20 अक्टूबर को दिवाली की पूजा के लिए 2 खास मुहूर्त प्राप्त होंगे. जिसमें पहला मुहूर्त प्रदोष काल है, इस दिन प्रदोष काल की शुरुआत शाम 5 बजकर 46 मिनट से होगी और इसका समापन रात 8 बजकर 18 मिनट पर होगा. इसके अलावा, स्थिर लग्न का वृषभ काल में भी मां लक्ष्मी के पूजन का अच्छा मुहूर्त माना जाता है जो कि शाम 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगा. 

इन दोनों मुहूर्तों के अलावा, मां लक्ष्मी की पूजा का खास मुहूर्त शाम 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जाएगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 11 मिनट की रहेगी. इसके अलावा, इस दिन महानिशीथ काल मध्यरात्रि 11 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर अर्धरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.

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